Rigveda / 9 / 40 / 5
स न॑: पुना॒न आ भ॑र र॒यिं स्तो॒त्रे सु॒वीर्य॑म् । ज॒रि॒तुर्व॑र्धया॒ गिर॑: ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 40 | Mantra No : 5
In English:
Seer : bRRihanmatiH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : nichRRidgaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : sa naH punaana aa bhara rayi.m stotre suviiryam . jariturvardhayaa giraH .
Component Words : saH . naH . punaanaH . aa . bhara . rayim . stotre . su.aviiryam . jarituH . vardhaya . giraH . 9.40.5
In Hindi:
ऋषि : बृहन्मतिः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : सः । नः॒ । पु॒ना॒नः । आ । भ॒र॒ । र॒यिम् । स्तो॒त्रे । सु॒ऽवीर्य॑म् । ज॒रि॒तुः । व॒र्ध॒य॒ । गिरः॑ ॥ ९.४०.५
पदार्थ : (स) हे परमात्मन् ! वह पूर्वोक्त आप (नः स्तोत्रे) आपकी स्तुति करनेवाले मुझको (पुनानः) पवित्र करते हुए (सुवीर्यम् रयिम्) सुन्दर पराक्रम के साथ ऐश्वर्य को (आभर) दीजिये (जरितुः गिरः वर्धय) और मुझ उपासक की वाक्शक्ति को बढ़ाइये ॥५॥
भावार्थ : जो लोग परमात्मपरायण होकर अपनी वाक्शक्ति को बढ़ाते हैं, परमात्मा उन्हें वाग्मी अर्थात् सुन्दर वक्ता बनाता है ॥५॥
In Sanskrit:
ऋषि : बृहन्मतिः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : सः । नः॒ । पु॒ना॒नः । आ । भ॒र॒ । र॒यिम् । स्तो॒त्रे । सु॒ऽवीर्य॑म् । ज॒रि॒तुः । व॒र्ध॒य॒ । गिरः॑ ॥ ९.४०.५
भावार्थ :