Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 9 / 46 / 5

स प॑वस्व धनंजय प्रय॒न्ता राध॑सो म॒हः । अ॒स्मभ्यं॑ सोम गातु॒वित् ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 46 | Mantra No : 5

In Hindi:

ऋषि : अयास्यः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : सः । प॒व॒स्व॒ । ध॒न॒म्ऽज॒य॒ । प्र॒ऽय॒न्ता । राध॑सः । म॒हः । अ॒स्मभ्य॑म् । सो॒म॒ । गा॒तु॒ऽवित् ॥ ९.४६.५

पदार्थ : (धनञ्जय) हे अपने उपासकों के धन को बढ़ानेवाले ! (गातुवित्) हे उपदेशकों में श्रेष्ठ ! (सः) ऐसे विद्वानों के उत्पादक आप (महः राधसः) बड़े भारी ऐश्वर्य के (प्रयन्ता) प्रदाता हैं (सोम) हे परमात्मन् ! (अस्मभ्यम्) आप हमारे लिये (पवस्व) सब अभीष्ट प्रदान कीजिये ॥५॥

भावार्थ : परमात्मा की कृपा से सदुपदेशक उत्पन्न होकर देश में सदुपदेश देकर देश का कल्याण करते हैं ॥५॥