Rigveda / 9 / 61 / 29
अस्य॑ ते स॒ख्ये व॒यं तवे॑न्दो द्यु॒म्न उ॑त्त॒मे । सा॒स॒ह्याम॑ पृतन्य॒तः ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 61 | Mantra No : 29
In English:
Seer : amahiiyuH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : nichRRidgaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : asya te sakhye vaya.m tavendo dyumna uttame . saasahyaama pRRitanyataH .
Component Words : asya . te . sakhye . vayam . tava . indo iti . dyumne . ut.atame . sasahyaama . pRRitanyataH . 9.61.29
In Hindi:
ऋषि : अमहीयुः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : अस्य॑ । ते॒ । स॒ख्ये । व॒यम् । तव॑ । इ॒न्दो॒ इति॑ । द्यु॒म्ने । उ॒त्ऽत॒मे । स॒स॒ह्याम॑ । पृ॒त॒न्य॒तः ॥ ९.६१.२९
पदार्थ : (अस्य ते सख्ये) तुम्हारे मित्रभाव को प्राप्त होकर (इन्दो) हे सुन्दर यश से प्रकाशित ! (तव उत्तमे द्युम्ने) तुम्हारे उत्तम यश के निमित्त हम (पृतन्यतः ससह्याम) संग्राम में युद्ध के निमित्त आये हुए प्रतिपक्षियों को अभिभूत करें ॥२९॥
भावार्थ : इस मन्त्र में परमात्मा ने राजधर्म में साहाय्य का उपदेश किया है ॥२९॥
In Sanskrit:
ऋषि : अमहीयुः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : अस्य॑ । ते॒ । स॒ख्ये । व॒यम् । तव॑ । इ॒न्दो॒ इति॑ । द्यु॒म्ने । उ॒त्ऽत॒मे । स॒स॒ह्याम॑ । पृ॒त॒न्य॒तः ॥ ९.६१.२९
भावार्थ :