Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 9 / 64 / 21

अ॒भि वे॒ना अ॑नूष॒तेय॑क्षन्ति॒ प्रचे॑तसः । मज्ज॒न्त्यवि॑चेतसः ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 64 | Mantra No : 21

In Hindi:

ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : विराड्गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : अ॒भि । वे॒नाः । अ॒नू॒ष॒त॒ । इय॑क्षन्ति । प्रऽचे॑तसः । मज्ज॑न्ति । अवि॑ऽचेतसः ॥ ९.६४.२१

पदार्थ : (प्रचेतसो वेनाः) प्रकृष्ट ज्ञानवाले विज्ञानी लोग (अभ्यनूषत) परमात्मा की उपासना करते हैं और (इयक्षन्ति) उपासनात्मक यज्ञ से परमात्मा का यजन करते हैं। (अविचेतसः) अज्ञानी लोग (मज्जन्ति) डूबते हैं ॥२१॥

भावार्थ : जो लोग शुद्ध मनवाले हैं, वे परमात्मा के तत्त्वज्ञान से मुक्ति के भागी होते हैं और अज्ञानी लोग बार-बार जन्म लेते हैं और मरते हैं, परन्तु फिर भी परमात्मा के तत्त्व को नहीं पाते। इसीलिये उनका यहाँ डूबना दिखलाया है ॥२१॥