Rigveda / 9 / 85 / 11
नाके॑ सुप॒र्णमु॑पपप्ति॒वांसं॒ गिरो॑ वे॒नाना॑मकृपन्त पू॒र्वीः । शिशुं॑ रिहन्ति म॒तय॒: पनि॑प्नतं हिर॒ण्ययं॑ शकु॒नं क्षाम॑णि॒ स्थाम् ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 85 | Mantra No : 11
In English:
Seer : veno bhaargavaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : bhuriktriShTup | Tone : dhaivataH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : naake suparNamupapaptivaa.msa.m giro venaanaamakRRipanta puurviiH . shishu.m rihanti matayaH panipnata.m hiraNyaya.m shakuna.m kShaamaNi sthaam .
Component Words : naake . su.aparNam . upapapti.avaa.msam . giraH . venaanaam . akRRipanta . puurviiH . shishum . rihanti . matayaH . panipnatam . hiraNyayam . shakunam . kShaamaNi . sthaam . 9.85.11
In Hindi:
ऋषि : वेनो भार्गवः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : भुरिक्त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
विषय :
पदपाठ : नाके॑ । सु॒ऽप॒र्णम् । उ॒प॒प॒प्ति॒ऽवांस॑म् । गिरः॑ । वे॒नाना॑म् । अ॒कृ॒प॒न्त॒ । पू॒र्वीः । शिशु॑म् । रि॒ह॒न्ति॒ । म॒तयः॑ । पनि॑प्नतम् । हि॒र॒ण्यय॑म् । श॒कु॒नम् । क्षाम॑णि । स्था॒म् ॥ ९.८५.११
पदार्थ : (वेनानां) उपासक लोगों की (पूर्वीः गिरः) बहुत सी वाणियें (उप अकृपन्त) उसकी स्तुति करती हैं, जो (नाके) सुख में (सुपर्णम्) अपनी चित्सत्ता से (उपपप्तिवांसम्) शब्दायमान होता है। शिशुम् श्यति सूक्ष्मं करोति प्रलयकाले इति शिशुः परमात्मा, जो प्रलयकाल में सब पदार्थों को सूक्ष्म करे, उसका नाम यहाँ शिशु है। उस परमात्मा को (मतयः) बुद्धियाँ (रिहन्ति) प्राप्त होती हैं। (पनिप्नतम्) जो शब्दायमान है (हिरण्ययम्) प्रकाशस्वरूप है और (शकुनम्) शक्नोति सर्व कर्तुमिति शकुनम्, जो सर्वशक्तिमान् हो, उसका नाम यहाँ शकुन है। (क्षामणि स्थाम्) जो क्षमा में स्थिर है ॥११॥
भावार्थ : परमात्मा विद्वानों की वाणी द्वारा मनुष्यों के हृदय में प्रकाशित होता है, इसलिये मनुष्यों को चाहिये कि वे सदोपदेश द्वारा उसका ग्रहण करें ॥११॥
In Sanskrit:
ऋषि : वेनो भार्गवः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : भुरिक्त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
पदपाठ : नाके॑ । सु॒ऽप॒र्णम् । उ॒प॒प॒प्ति॒ऽवांस॑म् । गिरः॑ । वे॒नाना॑म् । अ॒कृ॒प॒न्त॒ । पू॒र्वीः । शिशु॑म् । रि॒ह॒न्ति॒ । म॒तयः॑ । पनि॑प्नतम् । हि॒र॒ण्यय॑म् । श॒कु॒नम् । क्षाम॑णि । स्था॒म् ॥ ९.८५.११
भावार्थ :