Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 9 / 97 / 28

अश्वो॒ नो क्र॑दो॒ वृष॑भिर्युजा॒नः सिं॒हो न भी॒मो मन॑सो॒ जवी॑यान् । अ॒र्वा॒चीनै॑: प॒थिभि॒र्ये रजि॑ष्ठा॒ आ प॑वस्व सौमन॒सं न॑ इन्दो ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 97 | Mantra No : 28

In Hindi:

ऋषि : वसुक्रो वासिष्ठः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः

विषय :

पदपाठ : अश्वः॑ । न । क्र॒दः॒ । वृष॑ऽभिः । यु॒जा॒नः । सिं॒हः । न । भी॒मः । मन॑सः । जवी॑यान् । अ॒र्वा॒चीनैः॑ । प॒थिऽभिः॑ । ये । रजि॑ष्ठाः । आ । प॒व॒स्व॒ । सौ॒म॒न॒सम् । नः॒ । इ॒न्दो॒ इति॑ ॥ ९.९७.२८

पदार्थ : (इन्दो) हे प्रकाशस्वरूप परमात्मन् ! (अर्वाचीनैः) आपके अभिमुख करनेवाले (पथिभिः) मार्गों से (ये) जो मार्ग (रजिष्ठाः) सरल हैं, उनके द्वारा (नः) हमको (सौमनसम्) संस्कृत मन देकर पवित्र करें। आप (मनसो जवीयान्) मन के वेग से भी शीघ्रगामी हैं, (अर्थात्) मन के पहुँचने से पहिले वहाँ विद्यमान हैं। (सिंहः) सिंह के (न) समान भयप्रद हैं, (अश्वः) विद्युत् के (न) समान (क्रदः) शब्दायमान हैं (वृषभिः) योगियों से (युजानः) जुड़े हुए हैं ॥२८॥

भावार्थ : जो लोग परमात्मा से मन की शुद्धि की प्रार्थना करते हैं, परमात्मा उनके मन को शुद्ध करके उन्हें शुभ बुद्धि प्रदान करता है ॥२८॥