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Rigveda / 9 / 99 / 5

तमु॒क्षमा॑णम॒व्यये॒ वारे॑ पुनन्ति धर्ण॒सिम् । दू॒तं न पू॒र्वचि॑त्तय॒ आ शा॑सते मनी॒षिण॑: ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 99 | Mantra No : 5

In Hindi:

ऋषि : रेभसूनू काश्यपौ | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः

विषय :

पदपाठ : तम् । उ॒क्षमा॑णम् । अ॒व्यये॑ । वारे॑ । पु॒न॒न्ति॒ । ध॒र्ण॒सिम् । दू॒तम् । न । पू॒र्वऽचि॑त्तये । आ । शा॒स॒ते॒ । म॒नी॒षिणः॑ ॥ ९.९९.५

पदार्थ : (उक्षमाणम्, तम्) उक्त बलस्वरूप परमात्मा को (मनीषिणः) मेधावी लोग (अव्यये, वारे) रक्षायुक्त विषयों में (पुनन्ति) वर्णन करते हैं, (धर्णसिम्) सर्वाधार को (दूतम्, न) दुःखनिवारकरूप से (पूर्वचित्तये) सबसे प्रथम (आशासते) प्रार्थना करते हैं ॥५॥

भावार्थ : परमात्मा सम्पूर्ण जगत् का आधार है, इससे उसी की उपासना प्रथम करनी चाहिये ॥५॥