Rigveda / 9 / 101 / 9
य ओजि॑ष्ठ॒स्तमा भ॑र॒ पव॑मान श्र॒वाय्य॑म् । यः पञ्च॑ चर्ष॒णीर॒भि र॒यिं येन॒ वना॑महै ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 101 | Mantra No : 9
In English:
Seer : nahuSho maanavaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : nichRRidanuShTup | Tone : gaandhaaraH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : ya ojiShThastamaa bhara pavamaana shravaayyam . yaH pa~ncha charShaNiirabhi rayi.m yena vanaamahai .
Component Words : yaH . ojiShThaH . tam . aa . bhara . pavamaana . shravaayyam . yaH . pa~ncha . charShaNiiH . abhi . rayim . yena . vanaamahai . 9.101.9
In Hindi:
ऋषि : नहुषो मानवः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृदनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः
विषय :
पदपाठ : यः । ओजि॑ष्ठः । तम् । आ । भ॒र॒ । पव॑मान । श्र॒वाय्य॑म् । यः । पञ्च॑ । च॒र्ष॒णीः । अ॒भि । र॒यिम् । येन॑ । वना॑महै ॥ ९.१०१.९
पदार्थ : (पवमान) हे सबको पवित्र करनेवाले परमात्मन् ! (यः) जो यश (ओजिष्ठः) अत्यन्त ओजवाला है (श्रवाय्यम्) सुनने योग्य है, (यः) जो यश (पञ्च, चर्षणीः) पाँचों ज्ञानेन्द्रिय, अथवा पाँचों प्राणों को संस्कृत करता है, (येन) जिस परमात्मा के यश से (रयिम्) ऐश्वर्य्य को (वनामहै) हम प्राप्त हों (तं, आभर) उसको दीजिये ॥९॥
भावार्थ : यहाँ परमात्मा के आनन्द को लाभ करके आनन्दित होने का वर्णन है ॥९॥
In Sanskrit:
ऋषि : नहुषो मानवः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृदनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः
पदपाठ : यः । ओजि॑ष्ठः । तम् । आ । भ॒र॒ । पव॑मान । श्र॒वाय्य॑म् । यः । पञ्च॑ । च॒र्ष॒णीः । अ॒भि । र॒यिम् । येन॑ । वना॑महै ॥ ९.१०१.९
भावार्थ :