Rigveda / 9 / 109 / 11
तं ते॑ सो॒तारो॒ रसं॒ मदा॑य पु॒नन्ति॒ सोमं॑ म॒हे द्यु॒म्नाय॑ ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 109 | Mantra No : 11
In English:
Seer : agnayo dhiShNyaa aishvaraaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : svaraaDaarchiigaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : ta.m te sotaaro rasa.m madaaya punanti soma.m mahe dyumnaaya .
Component Words : tam . te . sotaaraH . rasam . madaaya . punanti . somam . mahe . dyumnaaya . 9.109.11
In Hindi:
ऋषि : अग्नयो धिष्ण्या ऐश्वराः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : स्वराडार्चीगायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : तम् । ते॒ । सो॒तारः॑ । रस॑म् । मदा॑य । पु॒नन्ति॑ । सोम॑म् । म॒हे । द्यु॒म्नाय॑ ॥ ९.१०९.११
पदार्थ : (सोतारः) उपासक लोग (ते) तुम्हारे (तं) उस (सोमं) शान्तिरूप (रसं) आनन्द को (मदाय) आनन्दित होने के लिये तथा (महे, द्युम्नाय) बड़े ऐश्वर्य्यप्राप्ति के लिये धारणा द्वारा (पुनन्ति) पवित्र करते हैं ॥११॥
भावार्थ : इस मन्त्र का भाव यह है कि उपासक लोग इस विराट् स्वरूप को देखकर ईश्वर की धारणा अपने हृदय में करते हैं, यही इस ऐश्वर्य्य को पवित्र बनाना है ॥११॥
In Sanskrit:
ऋषि : अग्नयो धिष्ण्या ऐश्वराः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : स्वराडार्चीगायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : तम् । ते॒ । सो॒तारः॑ । रस॑म् । मदा॑य । पु॒नन्ति॑ । सोम॑म् । म॒हे । द्यु॒म्नाय॑ ॥ ९.१०९.११
भावार्थ :