Rigveda / 10 / 22 / 10
त्वं तान्वृ॑त्र॒हत्ये॑ चोदयो॒ नॄन्का॑र्पा॒णे शू॑र वज्रिवः । गुहा॒ यदी॑ कवी॒नां वि॒शां नक्ष॑त्रशवसाम् ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 10 | Sukta : 22 | Mantra No : 10
In English:
Seer : vimada aindraH praajaapatyo vaa vasukRRidvaa vaasukraH | Devta : indra: | Metre : paadnichRRidbRRihatii | Tone : madhyamaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : tva.m taanvRRitrahatye chodayo nRRInkaarpaaNe shuura vajrivaH . guhaa yadii kaviinaa.m vishaa.m nakShatrashavasaam .
Component Words : tvam . taan . vRRitra.ahatye . chodayaH . nRRIn . kaarpaaNe . shuura . vajri.avaH . guhaa . yadi . kaviinaam . vishaam . nakShatra.ashavasaam . 10.22.10
In Hindi:
ऋषि : विमद ऐन्द्रः प्राजापत्यो वा वसुकृद्वा वासुक्रः | देवता : इन्द्र: | छन्द : पाद्निचृद्बृहती | स्वर : मध्यमः
विषय :
पदपाठ : त्वम् । तान् । वृ॒त्र॒ऽहत्ये॑ । चो॒दयः॒ । नॄन् । का॒र्पा॒णे । शू॒र॒ । व॒ज्रि॒ऽवः॒ । गुहा॑ । यदि॑ । क॒वी॒नाम् । वि॒शाम् । नक्ष॑त्रऽशवसाम् ॥ १०.२२.१०
पदार्थ : (शूर वज्रिवः) हे पराक्रमशील ओजस्वी परमात्मन् ! या वज्रवाले राजन् ! तू उन मुमुक्षु उपासकों या राष्ट्रनायकों सैनिकों को (वृत्रहत्ये कार्पाणे) पापनाशक कार्य में अथवा आक्रमणकारी की हत्या जिसमें हो, ऐसे कृपाणयुक्त संग्राम में (चोदय) प्रेरित कर उत्साहित कर (नक्षत्रशवसां कवीनां विशां गुहा यदि) अक्षीण धनवाले, अध्यात्म ऐश्वर्यवाले विद्वानों के तेरे में प्रवेश करते हुए उपासकों के जब कभी तू प्रेरणा कर या अक्षीणबलवालों के क्रान्तिकारी जनों के गूहनीय स्थल-शिविर में जब कभी भी प्रेरणा कर ॥१०॥
भावार्थ : परमात्मा मुमुक्षुजनों के पापनाशन-कार्य में या राजा आक्रमणकारी की हत्या के अवसर पर कृपाणयुक्त संग्राम में बल की प्रेरणा करता है। अध्यात्म ऐश्वर्यरूप धनवाले विद्वानों को परमात्मा जैसे प्रेरणा देता है, ऐसे ही राजा भी बलवान् पुरुषों को प्रेरणा देता है ॥१०॥
In Sanskrit:
ऋषि : विमद ऐन्द्रः प्राजापत्यो वा वसुकृद्वा वासुक्रः | देवता : इन्द्र: | छन्द : पाद्निचृद्बृहती | स्वर : मध्यमः
पदपाठ : त्वम् । तान् । वृ॒त्र॒ऽहत्ये॑ । चो॒दयः॒ । नॄन् । का॒र्पा॒णे । शू॒र॒ । व॒ज्रि॒ऽवः॒ । गुहा॑ । यदि॑ । क॒वी॒नाम् । वि॒शाम् । नक्ष॑त्रऽशवसाम् ॥ १०.२२.१०
भावार्थ :