Rigveda / 10 / 24 / 6
मधु॑मन्मे प॒राय॑णं॒ मधु॑म॒त्पुन॒राय॑नम् । ता नो॑ देवा दे॒वत॑या यु॒वं मधु॑मतस्कृतम् ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 10 | Sukta : 24 | Mantra No : 6
In English:
Seer : vimada aindraH praajaapatyo vaa vasukRRidvaa vaasukraH | Devta : ashvinau | Metre : anuShTup | Tone : gaandhaaraH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : madhumanme paraayaNa.m madhumatpunaraayanam . taa no devaa devatayaa yuva.m madhumataskRRitam .
Component Words : madhu.amat . me . paraa.aayaNam . madhu.amat . punaH . aa.aayanam . taa . naH . devaa . devatayaa . yuvam . madhu.amataH . kRRitam . 10.24.6
In Hindi:
ऋषि : विमद ऐन्द्रः प्राजापत्यो वा वसुकृद्वा वासुक्रः | देवता : अश्विनौ | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः
विषय :
पदपाठ : मधु॑ऽमत् । मे॒ । प॒रा॒ऽअय॑णम् । मधु॑ऽमत् । पुनः॑ । आऽअय॑नम् । ता । नः॒ । दे॒वा॒ । दे॒वत॑या । यु॒वम् । मधु॑ऽमतः । कृ॒त॒म् ॥ १०.२४.६
पदार्थ : (मे परायणं मधुमत्) हे राजसभेश और सेनापति तुम्हारे द्वारा चालित और रक्षित राष्ट्र में मुझ राष्ट्रपति का बहिर्गमन मधुमय हो-जहाँ मैं जाऊँ, वहाँ के प्रजाजनों के लिये भी कल्याणमय हो (ता देवा युवम् देवतया नः-मधुमतः कृतम्) वे तुम विद्वान् अपनी विद्वत्ता के द्वारा हमको मधुयुक्त-आनन्दयुक्त करो ॥६॥
भावार्थ : कुशल राजसभेश तथा सेनेश के द्वारा सञ्चालित तथा रक्षित राष्ट्र में वर्त्तमान राष्ट्रपति का अन्य राष्ट्र में जाना मधुमय अर्थात् कल्याणकारी हो, वहाँ की प्रजाओं के लिये भी तथा अपने राष्ट्र में फिर आगमन भी कल्याणकारी हो, ऐसे सभेश और सेनेश स्वराष्ट्रवासियों को कल्याण से युक्त करें ॥६॥
In Sanskrit:
ऋषि : विमद ऐन्द्रः प्राजापत्यो वा वसुकृद्वा वासुक्रः | देवता : अश्विनौ | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः
पदपाठ : मधु॑ऽमत् । मे॒ । प॒रा॒ऽअय॑णम् । मधु॑ऽमत् । पुनः॑ । आऽअय॑नम् । ता । नः॒ । दे॒वा॒ । दे॒वत॑या । यु॒वम् । मधु॑ऽमतः । कृ॒त॒म् ॥ १०.२४.६
भावार्थ :