Rigveda / 10 / 27 / 5
न वा उ॒ मां वृ॒जने॑ वारयन्ते॒ न पर्व॑तासो॒ यद॒हं म॑न॒स्ये । मम॑ स्व॒नात्कृ॑धु॒कर्णो॑ भयात ए॒वेदनु॒ द्यून्कि॒रण॒: समे॑जात् ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 10 | Sukta : 27 | Mantra No : 5
In English:
Seer : vasukra aindraH | Devta : indra: | Metre : triShTup | Tone : dhaivataH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : na vaa u maa.m vRRijane vaarayante na parvataaso yadaha.m manasye . mama svanaatkRRidhukarNo bhayaata evedanu dyuunkiraNaH samejaat .
Component Words : na . vai . uu.N iti . maam . vRRijane . vaarayante . na . parvataasaH . yat . aham . manasye . mama . svanaat . kRRidhu.akarNaH . bhayaate . eva . it . anu . dyuun . kiraNaH . sam . ejaat . 10.27.5
In Hindi:
ऋषि : वसुक्र ऐन्द्रः | देवता : इन्द्र: | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
विषय :
पदपाठ : न । वै । ऊँ॒ इति॑ । माम् । वृ॒जने॑ । वा॒र॒य॒न्ते॒ । न । पर्व॑तासः । यत् । अ॒हम् । म॒न॒स्ये । मम॑ । स्व॒नात् । कृ॒धु॒ऽकर्णः॑ । भ॒या॒ते॒ । ए॒व । इत् । अनु॑ । द्यून् । कि॒रणः॑ । सम् । ए॒जा॒त् ॥ १०.२७.५
पदार्थ : (न वा-उ) न ही (वृजने) बलप्रसङ्ग में (मां वारयन्ते) कोई भी मुझे बल प्रदर्शन से हटा सकते हैं (यत्-अहं मनस्ये) जो मैं करना चाहता हूँ, उससे (पर्वतासः-न) पर्वतसमान बलवाले भी रोकने में समर्थ नहीं हैं, (मम स्वनात्) मेरे आदेश से-शासन से (कृधुकर्णः-भयाते-एव-इत्) अल्पकानवाला-अल्पेन्द्रियशक्तिवाला पापी जन भय करता ही है, (किरणः-अनुद्यून् सम् एजात्) प्रचण्ड किरणोंवाला सूर्य भी प्रतिदिन-दिनोंदिन सम्यक् गति करता है-अपना कार्य करता है-प्रकाश करता है ॥५॥
भावार्थ : परमात्मा को उसके बलप्रदर्शन से कोई हटा नहीं सकता। पर्वत जैसे महान् बलवान् भी उसको रोक नहीं सकते। सूर्य भी उसके अधीन चमकता है, प्रकाश देता है और अल्पशक्तिवाला जीवात्मा उससे भय खाता है-कर्मों के अनुसार फलों को भोगता ही है ॥५॥
In Sanskrit:
ऋषि : वसुक्र ऐन्द्रः | देवता : इन्द्र: | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
पदपाठ : न । वै । ऊँ॒ इति॑ । माम् । वृ॒जने॑ । वा॒र॒य॒न्ते॒ । न । पर्व॑तासः । यत् । अ॒हम् । म॒न॒स्ये । मम॑ । स्व॒नात् । कृ॒धु॒ऽकर्णः॑ । भ॒या॒ते॒ । ए॒व । इत् । अनु॑ । द्यून् । कि॒रणः॑ । सम् । ए॒जा॒त् ॥ १०.२७.५
भावार्थ :