Rigveda / 10 / 64 / 12
यां मे॒ धियं॒ मरु॑त॒ इन्द्र॒ देवा॒ अद॑दात वरुण मित्र यू॒यम् । तां पी॑पयत॒ पय॑सेव धे॒नुं कु॒विद्गिरो॒ अधि॒ रथे॒ वहा॑थ ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 10 | Sukta : 64 | Mantra No : 12
In English:
Seer : gayaH plaataH | Devta : vishvedevaa: | Metre : triShTup | Tone : dhaivataH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : yaa.m me dhiya.m maruta indra devaa adadaata varuNa mitra yuuyam . taa.m piipayata payaseva dhenu.m kuvidgiro adhi rathe vahaatha .
Component Words : yam . me . dhiyam . marutaH . indra . devaaH . adadaata . varuNa . mitra . yuuyam . taam . piipayata . payasaa.aiva . dhenum . kuvit . giraH . adhi . rathe . vahaatha . 10.64.12
In Hindi:
ऋषि : गयः प्लातः | देवता : विश्वेदेवा: | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
विषय :
पदपाठ : यम् । मे॒ । धिय॑म् । मरु॑तः । इन्द्र॑ । देवाः॑ । अद॑दात । व॒रु॒ण॒ । मि॒त्र॒ । यू॒यम् । ताम् । पी॒प॒य॒त॒ । पय॑साऽइव । धे॒नुम् । कु॒वित् । गिरः॑ । अधि॑ । रथे॑ । वहा॑थ ॥ १०.६४.१२
पदार्थ : (मरुतः) हे जीवन्मुक्त विद्वानों ! (इन्द्र) हे ज्ञानप्रकाशक आचार्य ! (वरुण) हे वरयिता उपदेशक ! (मित्र) हे प्रेरक अध्यापक ! (देवाः-यूयम्) विद्वानो तुम (यां-धियम्-अददात) जिस मेधा-ज्ञानबुद्धि को या कर्मबुद्धि को देते हो (तां पीपयत) उसे उसके फल से बढ़ाओ (पयसा-इव-धेनुम्) जैसे दूध से गोपाल गौ को प्रपूर्ण करता है, वैसे ही (गिरः-अधिरथे) विद्याओं-ज्ञानों को रमणीय मोक्ष में (कुवित्-वहाथ) बहुत प्रकार से प्रेरित करो, मोक्ष प्राप्त करने को भावित करो ॥१२॥
भावार्थ : जिज्ञासु को जीवन्मुक्तों, अध्यापकों, उपदेशकों एवं प्रमुख आचार्यों से शिक्षण पाकर अपनी ज्ञान-शक्ति और कर्मशक्ति को बढ़ाना चाहिए। अन्त में मोक्ष का अधिकारी बने ॥१२॥
In Sanskrit:
ऋषि : गयः प्लातः | देवता : विश्वेदेवा: | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
पदपाठ : यम् । मे॒ । धिय॑म् । मरु॑तः । इन्द्र॑ । देवाः॑ । अद॑दात । व॒रु॒ण॒ । मि॒त्र॒ । यू॒यम् । ताम् । पी॒प॒य॒त॒ । पय॑साऽइव । धे॒नुम् । कु॒वित् । गिरः॑ । अधि॑ । रथे॑ । वहा॑थ ॥ १०.६४.१२
भावार्थ :