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Rigveda / 10 / 90 / 10

तस्मा॒दश्वा॑ अजायन्त॒ ये के चो॑भ॒याद॑तः । गावो॑ ह जज्ञिरे॒ तस्मा॒त्तस्मा॑ज्जा॒ता अ॑जा॒वय॑: ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 10 | Sukta : 90 | Mantra No : 10

In Hindi:

ऋषि : नारायणः | देवता : पुरुषः | छन्द : निचृदनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः

विषय :

पदपाठ : तस्मा॑त् । अश्वाः॑ । अ॒जा॒य॒न्त॒ । ये । के । च॒ । उ॒भ॒याद॑तः । गावः॑ । ह॒ । ज॒ज्ञि॒रे॒ । तस्मा॑त् । तस्मा॑त् । जा॒ताः । अ॒जा॒वयः॑ ॥ १०.९०.१०

पदार्थ : (तस्मात्) उस परमात्मा से (अश्वाः-अजायन्त) अश्वादि पशु उत्पन्न हुए (ये के च उभयादतः) और जो कोई ऊपर-नीचे दोनों ओर दाँतवाले हैं, वे भी उत्पन्न हुए (तस्मात्-गावः-ह जज्ञिरे) उस परमात्मा से गवादि  उत्पन्न हुए (तस्मात्-अजावयः-जाताः) उसी परमात्मा से बकरियाँ भेड़ें उत्पन्न हुईं ॥१०॥

भावार्थ : परमात्मा ने घोड़े जाति के पशु दोनों ओर दाँतोंवाले पशु तथा गौवें बकरी भेड़ें आदि उत्पन्न करी हैं ॥१०॥