Rigveda / 10 / 98 / 8
यं त्वा॑ दे॒वापि॑: शुशुचा॒नो अ॑ग्न आर्ष्टिषे॒णो म॑नु॒ष्य॑: समी॒धे । विश्वे॑भिर्दे॒वैर॑नुम॒द्यमा॑न॒: प्र प॒र्जन्य॑मीरया वृष्टि॒मन्त॑म् ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 10 | Sukta : 98 | Mantra No : 8
In English:
Seer : devaapiraarShTiSheNaH | Devta : devaaH | Metre : nichRRittriShTup | Tone : dhaivataH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : ya.m tvaa devaapiH shushuchaano agna aarShTiSheNo manuShyaH samiidhe . vishvebhirdevairanumadyamaanaH pra parjanyamiirayaa vRRiShTimantam .
Component Words : yam . tvaa . deva.aaapiH . shushuchaanaH . agne . aarShTiSheNaH . manuShyaH . sam.aiidhe . vishvebhiH . devaiH . anu.amadyamaanaH . pra . parjanyam . iiraya . vRRiShTi.amantam . 10.98.8
In Hindi:
ऋषि : देवापिरार्ष्टिषेणः | देवता : देवाः | छन्द : निचृत्त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
विषय :
पदपाठ : यम् । त्वा॒ । दे॒वऽआ॑पिः । शु॒शु॒चा॒नः । अ॒ग्ने॒ । आ॒र्ष्टि॒षे॒णः । म॒नु॒ष्यः॑ । स॒म्ऽई॒धे । विश्वे॑भिः । दे॒वैः । अ॒नु॒ऽम॒द्यमा॑नः । प्र । प॒र्जन्य॑म् । ई॒र॒य॒ । वृ॒ष्टि॒ऽमन्त॑म् ॥ १०.९८.८
पदार्थ : (अग्ने) हे अग्रणायक राजन् ! (यत्) जब (आर्ष्टिषेणः-देवापिः) ज्ञानशक्तिसेनासम्पन्न का रक्षक पुरोहित विद्वान् मननशील (त्वा समीधे) तुझे तेजस्वी करता है-बनाता है (विश्वेभिः) सब (देवैः) वैज्ञानिकों के साथ (अनुमद्यमानः) अनुकूल मति प्राप्त करता हुआ (वृष्टिमन्तम्) वृष्टिवाले (पर्जन्यम्) मेघ को (प्र-ईरय) प्रेरित करता है ॥८॥
भावार्थ : ज्ञान और शस्त्रास्त्रशक्तिसम्पन्न विद्वान् पुरोहित राजा को जैसे तेजस्वी बनाता है, ऐसे ही समस्त विद्वानों की सहमति से वैज्ञानिक प्रयोग द्वारा राष्ट्र में जलवृष्टि करनेवाले मेघ को नीचे प्रेरित कर लेता है ॥८॥
In Sanskrit:
ऋषि : देवापिरार्ष्टिषेणः | देवता : देवाः | छन्द : निचृत्त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
पदपाठ : यम् । त्वा॒ । दे॒वऽआ॑पिः । शु॒शु॒चा॒नः । अ॒ग्ने॒ । आ॒र्ष्टि॒षे॒णः । म॒नु॒ष्यः॑ । स॒म्ऽई॒धे । विश्वे॑भिः । दे॒वैः । अ॒नु॒ऽम॒द्यमा॑नः । प्र । प॒र्जन्य॑म् । ई॒र॒य॒ । वृ॒ष्टि॒ऽमन्त॑म् ॥ १०.९८.८
भावार्थ :