Rigveda / 2 / 41 / 15
इन्द्र॑ज्येष्ठा॒ मरु॑द्गणा॒ देवा॑सः॒ पूष॑रातयः। विश्वे॒ मम॑ श्रुता॒ हव॑म्॥
Veda : Rigveda | Mandal : 2 | Sukta : 41 | Mantra No : 15
In English:
Seer : gRRitsamadaH shaunakaH | Devta : vishvedevaa: | Metre : gaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation Under Process
Verse : indrajyeShThaa marudgaNaa devaasaH puuSharaatayaH. vishve mama shrutaa havam.
Component Words : indra.ajyeShThaaH. marut.agaNaaH. devaasaH. puuSha.araatayaH. vishve. mama. shruta. havam.
In Hindi:
ऋषि : गृत्समदः शौनकः | देवता : विश्वेदेवा: | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय : फिर उसी विषय को कहते हैं।
पदपाठ : इन्द्र॑ऽज्येष्ठाः। मरु॑त्ऽगणाः। देवा॑सः। पूष॑ऽरातयः। विश्वे॑। मम॑। श्रु॒त॒। हव॑म्॥
पदार्थ : हे (इन्द्रज्येष्ठाः) परम विद्यारूप ऐश्वर्य जिनके प्रधान है वे (विश्वे) सब (देवासः) विद्वानो ! (पूषरातयः) जिनका पुष्टि के निमित्त दान है वे (मरुद्गणाः) बहुत मनुष्य तुम लोग (मम) मेरे (हवम्) ग्रहण करने योग्य विद्यार्थसम्बन्ध को (श्रुत) सुनो ॥१५॥
भावार्थ : जो विद्यादि गुणों में प्रधान पुरुष का सत्कार करते विद्या देते और दूसरों से लेते हैं, वे परीक्षक होके औरों को विद्वान् करते हैं ॥१५॥
In Sanskrit:
ऋषि : गृत्समदः शौनकः | देवता : विश्वेदेवा: | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय : पुनस्तमेव विषयमाह।
पदपाठ : इन्द्र॑ऽज्येष्ठाः। मरु॑त्ऽगणाः। देवा॑सः। पूष॑ऽरातयः। विश्वे॑। मम॑। श्रु॒त॒। हव॑म्॥
पदार्थ : (इन्द्रज्येष्ठाः) इन्द्रः परमविद्यैश्वर्यं प्रधानमेषां ते (मरुद्गणाः) मरुतां मनुष्याणां समूहाः (देवासः) विद्याभिः प्रकाशमानाः (पूषरातयः) पुष्टे रातिर्दानं येषान्ते (विश्वे) सर्वे (मम) (श्रुत)। अत्र द्व्यचोऽतस्तिङ इति दीर्घः। (हवम्) ॥१५॥
अन्वय : हे इन्द्रज्येष्ठा विश्वे देवासः पूषरातयो मरुद्गणा यूयं मम हवं श्रुत ॥१५॥
भावार्थ : ये विद्यादिगुणप्रधानं पुरुषं सत्कुर्वन्ति विद्यां ददति गृह्णन्ति च ते परीक्षका भूत्वाऽन्यान् विदुषः कुर्वन्तु ॥१५॥