Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 4 / 37 / 6

सेदृ॑भवो॒ यमव॑थ यू॒यमिन्द्र॑श्च॒ मर्त्य॑म्। स धी॒भिर॑स्तु॒ सनि॑ता मे॒धसा॑ता॒ सो अर्व॑ता ॥६॥

Veda : Rigveda | Mandal : 4 | Sukta : 37 | Mantra No : 6

In Hindi:

ऋषि : वामदेवो गौतमः | देवता : ऋभवः | छन्द : निचृदनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः

विषय : फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदपाठ : सः। इत्। ऋ॒भ॒वः॒। यम्। अव॑थ। यू॒यम्। इन्द्रः॑। च॒। मर्त्य॑म्। सः। धी॒भिः। अ॒स्तु॒। सनि॑ता। मे॒धऽसा॑ता। सः। अर्व॑ता ॥६॥

पदार्थ : हे (ऋभवः) बुद्धिमान् जनो ! (यूयम्) आप लोग (यम्) जिस (मर्त्यम्) मनुष्य की (अवथ) रक्षा करते हो और (इन्द्रः) अत्यन्त ऐश्वर्य्य युक्त राजा (च) भी रक्षा करता है (सः) (इत्) वही (धीभिः) बुद्धियों से युक्त (सः) वह (सनिता) सत्य और असत्य का विभाग करनेवाला और (सः) वह (अर्वता) घोड़ा आदि से (मेधसाता) शुद्ध संग्राम में विजयी (अस्तु) होवे ॥६॥

भावार्थ : हे राजसेनाजनो ! जो आप लोगों के अध्यक्ष राजा और बुद्धिमान् रक्षक होवें तो आप लोगों का सर्वत्र विजय और सुख निरन्तर बढ़े ॥६॥