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Rigveda / 1 / 38 / 12

स्थि॒रा वः॑ सन्तु ने॒मयो॒ रथा॒ अश्वा॑स एषाम् । सुसं॑स्कृता अ॒भीश॑वः ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 1 | Sukta : 38 | Mantra No : 12

In Hindi:

ऋषि : कण्वो घौरः | देवता : मरूतः | छन्द : पिपीलिकामध्यानिचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : फिर भी उक्त विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

पदपाठ : स्थि॒राः । वः॒ । स॒न्तु॒ । ने॒मयः॑ । रथाः॑ । अश्वा॑सः । ए॒षा॒म् । सुऽसं॑स्कृताः । अ॒भीश॑वः॥

पदार्थ : हे विद्वान् लोगो ! (वः) तुम्हारे (एषाम्) इन पवनों के सकाश से (सुसंस्कृताः) उत्तम शिल्प विद्या से संस्कार किए हुए (नेमयः) कलाचक्र युक्त (रथाः) विमान आदि रथ (अभीशवः) मार्गों को व्याप्त करनेवाले (अश्वासः) अग्नि आदि वा घोड़ों के सदृश (स्थिराः) दृढ़ बलयुक्त (सन्तु) होवें ॥१२॥

भावार्थ : ईश्वर उपदेश करता है। हे मनुष्यो ! तुमको चाहिये कि अनेक प्रकार के कलाचक्र युक्त विमान आदि यानों को रच कर उनमें जल्दी चलनेवाले अग्नि जल के सम्प्रयोग वा पवनों के योग से सुख पूर्वक जाने-आने और शत्रुओं को जीतने आदि सब व्यवहारों को सिद्ध करो ॥१२॥