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Samveda/28

इममू षु त्वमस्माक सनिं गायत्रं नव्यासम्। अग्ने देवेषु प्र वोचः॥२८

Veda : Samveda | Mantra No : 28

In Hindi:

ऋषि : शुनः शेप आजीगर्तिः | देवता : अग्निः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : परमात्मा ने ही सृष्टि के आदि में वेदविज्ञान का प्रवचन किया था, यह कहते हैं।

पदपाठ : इमम्।उ।सु।त्वम्।अस्माकम्। सनिम्। गायत्रम्। नव्याँसम्। अग्ने। देवेषु। प्र । वोचः । ८।

पदार्थ : हे (अग्ने) अनन्तविद्यामय जगदीश्वर! (त्वम्) सब मङ्गलों को देनेवाले आप (इमम्) इस, (अस्माकम्) हम मनुष्यों के (सनिम्) बहुत बोधप्रद, (नव्यांसम्) नवीनतर (गायत्रम्) गायत्र्यादि छन्दों से युक्त चारों वेदों का (देवेषु) दिव्यगुणयुक्त विद्वान् ऋषियों के प्रति (सुप्रवोचः) सम्यक्तया सृष्टि के आदि में प्रवचन करते हो ॥८॥

भावार्थ : जगत्पिता, परम कारुणिक परमेश्वर मनुष्यों के कर्त्तव्यबोध के लिए सृष्टि के आदि में महर्षियों के हृदयों में चारों वेदों का उपदेश करता है, जिनका अध्ययन करके हम ज्ञानी बनते हैं। उसकी इस महती कृपा का कौन अभिनन्दन नहीं करेगा? ॥८॥