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Samveda/76

इडामग्ने पुरुदस सनिं गोः शश्वत्तम हवमानाय साध। स्यान्नः सूनुस्तनयो विजावाग्ने सा ते सुमतिर्भूत्वस्मे॥७६

Veda : Samveda | Mantra No : 76

In Hindi:

ऋषि : विश्वामित्रो गाथिनः | देवता : अग्निः | छन्द : त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः

विषय : अगले मन्त्र में परमात्मा से प्रार्थना की गयी है।

पदपाठ : इडाम्। अग्ने । पुरुदँसं।पुरु।दँसं। सनिम्। गोः ।शश्वत्तमम्। हवमानाय। साध। स्यात्। नः ।सूनुः। तनयः। विजावा । ।वि।जावा। अग्ने।सा।ते। सुमतिः।सु- मतिः। भूतु। अस्मेइति।४।

पदार्थ : हे (अग्ने) सबके अग्रनायक परमात्मन् ! आप (हवमानाय) अग्निहोत्र करनेवाले तथा आत्मसमर्पण-रूप हवि देनेवाले मेरे लिए (इडाम्) भूमि, अन्न और प्रशस्त वाणी तथा (गोः) गाय की (पुरुदंसम्) अनेकों यज्ञकर्मों को सिद्ध करनेवाली (सनिम्) दूध, दही, मक्खन आदि देनों को (शश्वत्तमम्) निरन्तर (साध) प्रदान करते रहिए। (नः) हमारा (सूनुः) पुत्र (तनयः) वंश, धन, सुख, कीर्ति आदि का विस्तार करनेवाला, (विजावा) विजयशील और विविध ऐश्वर्यों का उत्पादक (स्यात्) होवे। हे (अग्ने) ज्योतिष्प्रदाता परमात्मन् ! (सा) वह प्रसिद्ध (ते) आपकी (सुमतिः) अनुग्रहात्मक बुद्धि (अस्मे) हमें (भूतु) प्राप्त होवे ॥४॥

भावार्थ : हे परमपिता परमात्मन् ! अग्निहोत्ररूप देवयज्ञ को तथा स्तुति, प्रार्थना, उपासना, समर्पणरूप ब्रह्मयज्ञ को करनेवाले मुझे कृपा कर कृषि एवं साम्राज्य के लिए भूमि, भोजन के लिए भोज्य अन्न आदि, ज्ञान-प्रसार के लिए प्रशस्त वाणी और शरीर की पुष्टि तथा दान के लिए गाय का दूध-दही-घी आदि प्रदान कीजिए। हमारी सन्तान को कुल, धन, धर्म, सुख, सामर्थ्य, न्याय, कीर्ति, चक्रवर्ती राज्य आदि का विस्तार करनेवाला और सब रिपुओं को जीतनेवाला बनाइये ॥४॥