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Samveda/218

ऋजुनीती नो वरुणो मित्रो नयति विद्वान्। अर्यमा देवैः सजोषाः॥२१८

Veda : Samveda | Mantra No : 218

In Hindi:

ऋषि : गोतमो राहूगणः | देवता : इन्द्रः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : अगले मन्त्र में यह प्रार्थना है कि इन्द्र से अधिष्ठित वरुण, मित्र आदि हमें सरल मार्ग से ले चलें।

पदपाठ : ऋजुनीती।ऋजु।नीति।नः। वरुणः। मित्रः।मि।त्रः। नयति विद्वान्। अर्यमा। देवैः। सजोषाः।स।जोषाः। ५ ।

पदार्थ : प्रथम—अध्यात्म के पक्ष में। हे इन्द्र परमात्मन् ! आपकी सहायता से (देवैः) चक्षु आदि इन्द्रियों के साथ (सजोषाः) प्रीतिवाला, (विद्वान्) ज्ञानी (वरुणः) पापों से निवारण करनेवाला जीवात्मा, (मित्रः) प्राण, और (अर्यमा) मन (नः) हमें (ऋजुनीती) सरल धर्ममार्ग से (नयति) ले चलें ॥द्वितीय—राष्ट्र के पक्ष में। हे इन्द्र राजन् ! (देवैः) अपने-अपने अधिकार में व्यवहार करनेवाले राजपुरुषों के साथ (सजोषाः) प्रीतिवाला अर्थात् अनुकूलता रखनेवाला (विद्वान्) विद्वान् विद्यासभाध्यक्ष, (वरुणः) शत्रुनिवारक, शस्त्रास्त्रधारी सेनाध्यक्ष, (मित्रः) कुत्सित आचरणरूप मृत्यु से त्राण करनेवाला धर्म-सभा का अध्यक्ष और (अर्यमा) न्यायसभा का अध्यक्ष (नः) हम प्रजाजनों को (ऋजुनीती) सरल धर्ममार्ग से (नयति) ले चलें ॥तृतीय—विद्वान् के पक्ष में। (देवैः) विद्या और व्रत-शिक्षा का दान करनेवाले सब अध्यापकों से (सजोषाः) सामञ्जस्य रखता हुआ (वरुणः) श्रेष्ठ गुण-कर्म-स्वभाववाला, छात्रों द्वारा आचार्यरूप में वरण किया गया व छात्रों को शिष्यरूप से वरनेवाला, (मित्रः) पापरूप मरण से त्राण करानेवाला, (अर्यमा) न्यायकारी (विद्वान्) विद्वान् आचार्य (नः) हम शिष्यों को (ऋजुनीती) सरल विद्या-दान और व्रत-पालन करने की नीति से (नयति) आगे ले चले, अर्थात् हमें सुयोग्य विद्या-व्रत-स्नातक बनाये ॥५॥इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है ॥५॥

भावार्थ : शरीर में विद्यमान जीवात्मा, प्राण, मन आदि देव परमात्मा के पास से बल प्राप्त कर मनुष्यों को धर्म-मार्ग से ले जाते हैं। उसी प्रकार राष्ट्र में विद्यासभा, धर्मसभा और न्यायसभा के अध्यक्ष तथा सेना का अध्यक्षप्रजाजनों को धर्ममार्ग में ले चलें । गुरुकुलवासी सुयोग्य अध्यापकों से युक्त, श्रेष्ठ गुण-कर्म-स्वभाववाला आचार्य भी शिष्यों को धर्म तथा विद्या के मार्ग में ले चले ॥५॥