Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Samveda/684

अभी षु णः सखीनामविता जरितृ़णाम्। शतं भवास्यूतये।।(टा)।।॥६८४

Veda : Samveda | Mantra No : 684

In Hindi:

ऋषि : वामदेवो गौतमः | देवता : इन्द्रः | छन्द : पादनिचृत् (गायत्री) | स्वर : षड्जः

विषय : अगले मन्त्र में परमात्मा से प्रार्थना की गयी है।

पदपाठ : अभि । सु । नः । सखानाम । स । खीनाम् । अविता । जरितॄणाम् । शतम् । भवासि । ऊतये ॥

पदार्थ : हे इन्द्र जगदीश्वर ! आप (सखीनाम्) आपके सखा (जरितॄणां नः) हम स्तोताओं की (शतम् ऊतये) सौ वर्ष तक प्रीति के लिए (अविता) रक्षक (सु) भली-भाँति (अभि) चारों ओर (भवासि) होओ ॥३॥

भावार्थ : जो जीवात्मा परमात्मा के सखा हो जाते हैं, उनका वह महान् कल्याण करता है ॥३॥