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Samveda/691

वरिवोधातमो भुवो महिष्ठो वृत्रहन्तमः। पर्षि राधो मघोनाम्(पौ)।।॥६९१

Veda : Samveda | Mantra No : 691

In Hindi:

ऋषि : मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : अगले मन्त्र में परमात्मा से प्रार्थना करते हैं।

पदपाठ : बरिबोधातमः । वरिवः । धातमः । भुवः । महि᳜᳜᳜᳜᳜ष्ठः । वृत्रहन्तमः । वृत्र । हन्तमः । पर्षि । राधः । मघोनाम् ॥

पदार्थ : हे इन्द्र परमात्मन् ! आप (वरिवोधातमः) अतिशय ऐश्वर्य को धारण करनेवाले, (मंहिष्ठः) सबसे बढ़कर दानी, (वृत्रहन्तमः) सबसे बड़े पापहन्ता (भुवः) सिद्ध हुए हो। आप ही (मघोनाम्) हम भौतिक धनों के धनियों को (राधः) सत्य, न्याय, दया, मोक्ष, आदि दिव्य धन (पर्षि) प्रदान करो ॥३॥

भावार्थ : वही मनुष्य वस्तुतः धनी है, जो भौतिक धन के साथ अध्यात्म धन भी कमाता है ॥३॥