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Samveda/986

ता वासम्यगद्रुह्वाणेषमश्याम धाम च। वयं वां मित्रा स्याम॥९८६

Veda : Samveda | Mantra No : 986

In Hindi:

ऋषि : उरुचक्रिरात्रेयः | देवता : मित्रावरुणौ | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : अगले मन्त्र में मित्र और वरुण से प्रार्थना की गयी है।

पदपाठ : ता ।वाम् ।सम्यक् ।अद्रुह्वाणा ।अ ।द्रुह्वाणा ।इषम् ।अश्याम। धाम् ।च ।वयम्। वाम्। मित्रा। मि ।त्रा। स्याम्॥

पदार्थ : हे (अद्रुह्वाणा) द्रोह न करनेवाले, मित्र-वरुण अर्थात् परमात्मा-जीवात्मा, राष्ट्रपति-प्रधानमन्त्री, अध्यापक-उपदेशक और प्राण-अपानो ! (ता वाम्) उन तुम दोनों की हम स्तुति करते हैं। तुम्हारी अनुकूलता से हम (इषम्) अन्न, रस, धन, विज्ञान आदि (धाम च) और तेज (सम्यक्) समुचित प्रकार से (अश्याम) प्राप्त करें। हे (मित्रा) सबके मित्रो ! (वयम्) हम स्तोता लोग (वाम्) तुम्हारे (स्याम) हो जाएँ ॥२॥

भावार्थ : परमात्मा-जीवात्मा, राष्ट्रपति-प्रधानमन्त्री, अध्यापक-उपदेशक और प्राण-अपान यथायोग्य उपयोग किये जाने पर महान् उपकार करते हैं ॥२॥