Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Samveda/1291

एष शुष्म्यदाभ्यः सोमः पुनानो अर्षति। देवावीरघशसहा (गु)।।॥१२९१

Veda : Samveda | Mantra No : 1291

In Hindi:

ऋषि : प्रियमेधः आङ्गिरसः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : आगे पुनः परमात्मा का वर्णन है।

पदपाठ : एषः । शुष्मी । अदाभ्य । अ । दाभ्यः । सोमः । पुनानः । अर्षति । देवावीः । देव । अवीः । अघशसदा । अघशस । हा॥

पदार्थ : (एषः) यह (शुष्मी) बलवान् (अदाभ्यः) दबाया या हराया न जा सकनेवाला, (देवावीः) दिव्यगुणों का रक्षक, (अघशंसहा) पापप्रशंसक भावों को नष्ट करनेवाला (सोमः) प्रेरक परमेश्वर (पुनानः) पवित्रता देता हुआ (अर्षति) सक्रिय है ॥६॥

भावार्थ : परमेश्वर से प्रेरणा प्राप्त करके सभी मनुष्य पवित्र हृदयवाले हों ॥६॥इस खण्ड में परमात्मा का विषय वर्णित होने से इस खण्ड की पूर्व खण्ड के साथ सङ्गति है ॥दशम अध्याय में पञ्चम खण्ड समाप्त ॥