Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Samveda/1436

तया पवस्व धारया यया गाव इहागमन्। जन्यास उप नो गृहम्॥१४३६

Veda : Samveda | Mantra No : 1436

In Hindi:

ऋषि : कविर्भार्गवः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : आगे फिर उसी विषय में कहा गया है।

पदपाठ : तया । पवस्व । धारया । यया । गावः । इह । आगमन् । आ । गमन् । जन्यासः । उप । नः । गृहम्॥

पदार्थ : हे तेज के धाम परमात्मन् ! आप (तया धारया) उस तेज की धारा से (पवस्व) हमें पवित्र करो, (यया) जिस धारा से (इह) यहाँ (नः गृहम्) हमारे हृदय-सदन में (जन्यासः) उत्तरोत्तर जन्म लेनेवाली (गावः) तेज की किरणें (उपागमन्) उपस्थित हो जाएँ ॥२॥

भावार्थ : परमात्मा के पास से प्रवाहित होते हुए तेज उसके स्तोताओं को तेजस्वी बना देते हैं ॥२॥