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Samveda/1477

होता देवो अमर्त्यः पुरस्तादेति मायया। विदथानि प्रचोदयन्॥१४७७

Veda : Samveda | Mantra No : 1477

In Hindi:

ऋषि : विश्वामित्रो गाथिनः | देवता : अग्निः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय : प्रथम मन्त्र में परमेश्वर का वर्णन है।

पदपाठ : होता । देवः । अमर्त्यः । अ । मर्त्यः । पुरस्तात् । एति । मायया । विदथानि । प्रचोदयान् । प्र । चोदयन्॥ ।

पदार्थ : (होता) कार्यसिद्धि को देनेवाला, (देवः) दिव्य गुणोंवाला, (अमर्त्यः) अमर अग्निनामक परमेश्वर (विदथानि) ज्ञानों, कर्मों और उच्च विचारों को (प्रचोदयन्) अन्तरात्मा में प्रेरित करता हुआ (मायया) ऋतम्भरा प्रज्ञा के साथ (पुरस्तात्) सम्मुख (एति) आता है ॥१॥

भावार्थ : योगाभ्यास द्वारा योगी लोग योगसिद्धि पाकर परमात्मा को बिलकुल सामने देखते हैं ॥१॥