In Hindi:
महर्षि दयानन्द व्याख्या : १६. शस्यच्छेदनप्रकरणम्
१ सम्प्रति केदाराः पक्वाः। इस समय खेत पक गये हैं।
२ यदि पक्वाः स्युस्तर्हि लुनन्तु। जो खेत पक गये हों तो काटो।
३ इदानीं कृषीवला अन्योऽन्यं केदारान् व्यतिलुनन्ति। खेती करने वाले आपस में एक दूसरे का पारापारी खेत काटते हैं।
४ ऐषमः धान्यानि प्रभूतानि जातानि। इस साल में धान्य बहुत हुए हैं।
५ अत एवैकस्या मुद्राया गोधूमाः खारी-प्रमिता अन्यानि तण्डुलादीन्यपि किञ्चिदधिकन्यूनानि लभन्ते। इसी से एक रुपये के गेहूँ एक मन और चावल आदि अन्न भी मन से कुछ अधिक न्यून मिलते हैं।