In Hindi:
संस्कृत में सूत्र की भूमिका : मूल प्रार्थना
महर्षि दयानन्द व्याख्या : व्याख्यान—हे ईश्वर! “भगः” आप और आपका दिया हुआ ऐश्वर्य “शं नः” हमारे लिए सुखकारक हो और “शमु, नः, शंसो अस्तु” आपकी कृपा से हमारी सुखकारक प्रशंसा सदैव हो। “पुरन्धिः, शमु, सन्तु, रायः” संसार के धारण करनेवाले आप तथा वायु, प्राण और सब धन आपकी कृपा से आनन्दायक हों। “शन्नः, सत्यस्य सुयमस्य शंसः” सत्य, यथार्थ धर्म, सुसंयम और जितेन्द्रियादिलक्षणयुक्त की जो प्रशंसा (पुण्यस्तुति)सब संसार में प्रसिद्ध है वह परमानन्द और शान्तियुक्त हमारे लिए हो। “शं नो, अर्यमा” न्यायकारी आप “पुरुजातः” अनन्तसामर्थ्ययुक्त हमारे कल्याणकारक होओ॥२५॥