In Hindi:
संस्कृत में सूत्र की भूमिका : मूल प्रार्थना
महर्षि दयानन्द व्याख्या : व्याख्यान—हे सर्वोत्कृष्टेश्वर! आप “वरुणः” वर (वरणीय)आनन्दस्वरूप हो, स्वकृपा से मुझको “मेधाम्” सर्व-विद्यासम्पन्न बुद्धि दीजिए तथा “अग्निः” विज्ञानमय, विज्ञानप्रद “प्रजापतिः” सब संसार के अधिष्ठाता, पालक “इन्द्रः” परमैश्वर्यवान् “वायुः” विज्ञानवान्, अनन्तबल “धाता” तथा सब जगत् का धारण और पोषण करनेवाले आप मुझको अत्युत्तम मेधा (बुद्धि)दीजिएर्ि “स्वाहा” इस प्रार्थना को आप प्रीति से स्वीकार कीजिए॥५४॥