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कर्म

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : जो मन, इन्द्रिय और शरीर में जीव चेष्टा विशेष करता है, वह ‘कर्म' कहलाता है । वह शुभ, अशुभ और मिश्र भेद से तीन प्रकार का है।