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गुरु

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : जो वीर्य दान से ले के भोजनादि कराके पालन करता है, इससे पिता को 'गुरु' कहते हैं, और जो अपने सत्योपदेश से हृदय का अज्ञान रूप अन्धकार मिटा देवे, उसको भी 'गुरु' अर्थात् आचार्य कहते हैं ।