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Choose Sutra

ज्येष्ठ कनिष्ठ व्यवहार

In Hindi:

महर्षि दयानन्द व्याख्या : जो बड़े और छोटों से यथा योग्य परस्पर मान्य करना है, उसको 'ज्येष्ठ कनिष्ठ व्यवहार' कहते हैं ।