Atharvaveda / 1 / 3 / 3
वि॒द्मा श॒रस्य॑ पि॒तरं॒ वरु॑णं श॒तवृ॑ष्ण्यम्। तेना॑ ते त॒न्वे॑३ शं क॑रं पृथि॒व्यां ते॑ नि॒षेच॑नं ब॒हिष्टे॑ अस्तु॒ बालिति॑ ॥ 3॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 1 | Sukta : 3 | Paryay : | Mantra No : 3
In English:
Seer : atharvaa | Devta : varuNaH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : vidmaa sharasya pitara.m varuNa.m shatavRRiShNyam. tenaa te tanve3 sha.m kara.m pRRithivyaa.m te niShechana.m bahiShTe astu baaliti . 3.
Component Words : vidma . sharasya . pitaram . varuNam . shata.avRRiShNyam .tena . te . tanve . sham . karam . pRRithivyaam . te . ni.asechanam . bahiH . te . astu . baal . iti .
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : वरुणः | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : शान्ति के लिये उपदेश।
पदपाठ : वि॒द्म । श॒रस्य॑ । पि॒तर॑म् । वरु॑णम् । श॒तऽवृ॑ष्ण्यम् ।तेन॑ । ते॒ । त॒न्वे । शम् । क॒र॒म् । पृ॒थि॒व्याम् । ते॒ । नि॒ऽसेच॑नम् । ब॒हिः । ते॒ । अ॒स्तु॒ । बाल् । इति॑ ॥
पदार्थ : (शरस्य) शत्रुनाशक [वा बाणधारी] शूर के (पितरम्) रक्षक, पिता, (वरुणम्) लोकों के ढकनेवाले आकाशरूप विस्तीर्ण (शतवृष्ण्यम्) सैकड़ों सामर्थ्यवाले [परमेश्वर] को (विद्म) हम जानते हैं। (तेन) उस [ज्ञान] से (ते) तेरे (तन्वे) शरीर के लिये (शम्) नीरोगता (करम्) मैं करूँ और (पृथिव्याम्) पृथिवी पर (ते) तेरा (निसेचनम्) बहुत सेचन [वृद्धि] होवे और (ते) तेरा (बाल्) बैरी (बहिः) बाहिर (अस्तु) होवे, (इति) वस यही ॥३॥"
भावार्थ : आकाश में सूर्य भूमि आदि लोक स्थित हैं और परमेश्वर के आधीन आकाश भी है−इत्यादि ॥३॥ (वरुण) मध्यस्थान देवता निरु० १०।३। इससे वृष्टिजल का अर्थ प्रतीत होता है, परन्तु (पर्जन्य) शब्द मं १ में आ चुका है, इससे यहाँ पर वृष्टि का आधार और सबका ढकनेवाला आकाश अर्थ है। सायणभाष्य में रात्रि का अभिमानी देवता अर्थ है ॥
टिप्पणी :३−वरुणम्। कृवृदारिभ्य उनन्। उ० ३।५३। इति वृञ् वरणे-उनन्। आवृणोति लोकान्। मध्यस्थानदेवतासु−वरुणो वृणोतीति सतः−निरु० १०।३। लोकानामावरकम्, अन्तरिक्षम् आकाशं वा। वरणो रात्र्यभिमानी देवः−इति सायणः। शेषं पूर्ववद् व्याख्येयम्, मं० १ ॥