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Atharvaveda / 4 / 4 / 2

उदु॒षा उदु॒ सूर्य॒ उदि॒दं मा॑म॒कं वचः॑। उदे॑जतु प्र॒जाप॑ति॒र्वृषा॒ शुष्मे॑ण वा॒जिना॑ ॥ 2॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 4 | Sukta : 4 | Paryay : | Mantra No : 2

In Hindi:

ऋषि : अथर्वा | देवता : वनस्पतिः | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :

विषय : मनुष्य बल को बढ़ावे।

पदपाठ : उत् । उ॒षा: । उत् । ऊं॒ इति॑ । सूर्य॑: । उत् । इ॒दम् । मा॒म॒कम् । वच॑: । उत् । ए॒ज॒तु॒ । प्र॒जाऽप॑ति: । वृषा॑ । शुष्मे॑ण । वा॒जिना॑ ॥४.२॥

पदार्थ : (वाजिना) वेग रखनेवाले (शुष्मेण) बल वा प्रभाव से (उषाः) प्रभात वेला (उत्=उदेजतु) ऊँची होवे, (उ) और (सूर्यः) सूर्य (उत्) ऊँचा चढ़े, (इदम्) यह (मामकम्) मेरा (वचः) वचन (उत्) ऊँचा होवे, (प्रजापतिः) प्रजाओं की पालन करनेवाली (वृषा) बल बढ़ानेवाली [कोई ओषधि वा मूसाकन्नी ओषधि विशेष] (उदेजतु) ऊँची होवे ॥२॥ "

भावार्थ : मनुष्य प्रभात समय उठकर ईश्वर चिन्तनादि, सूर्य के उदय पर जीविकादि की प्राप्ति और आप्त पुरुषों से वेद अध्ययनादि और बलवर्धक वृषा आदि ओषधि सेवन से बलवृद्धि करके आनन्द भोगें ॥२॥ वृषा [स्त्रीलिङ्ग] ओषधि के नाम अमरकोष १४।८७, ८८ में ये हैं। चित्रोपचित्रा न्यग्रोधी द्रवन्ती शम्बरी वृषा। प्रत्यक् श्रेणी सुतश्रेणी रण्डा मूषिकपर्ण्यपि ॥ चित्रा, उपचित्रा, न्यग्रोधी, द्रवन्ती, शम्बरी, वृषा, प्रत्यक् श्रेणी, सुतश्रेणी, रण्डा, मूषिकपर्णी, ये दस नाम मूषा पर्णी के हैं ॥

टिप्पणी :२−(उत्) उदेजतु (उषाः) उषः किच्च। उ० ४।२३४। इति उष दाहे वधे च, यद्वा, उछी विवासे, यद्वा, वश कान्तौ असि। उषाः कस्मादुच्छतीति सत्या रात्रेरपरकालः-निरु० २।१८। उषा वष्टेः कान्तिकर्मण उच्छतेरितरा माध्यमिका-निरु० १२।५। कल्यम्। प्रभातकालः (उ) अपि (सूर्यः) रविः (इदम्) मन्त्रात्मकम् (मामकम्) अ० १।२९।५। मदीयम् (वचः) वचनम् (उदेजतु) एजृ कम्पने। उत्कम्पयतु। उदेतु (प्रजापतिः) प्रजायन्ते प्रजाः। उपसर्गे च संज्ञायाम्। पा० ३।२।८९। इति प्र+जनी प्रादुर्भावे-ड। प्रजानां पालयित्री (वृषा) अ० १।१२।१। वृषु सेचने, प्रजननैश्ययोः-कनिन्। यद्वा, क प्रत्ययः, टाप् स्त्रियाम्। बलसेचिका। ओषधिविशेषः। तत्पर्यायाः। चित्रा। उपचित्रादयः-अमरकोशे १४।८७, ८८ (शुष्मेण) अविसिविसिशुषिभ्यः कित्। उ० १।१४४। इति शुष शोषणे-मन्। शुष्ममिति बलनाम शोषयतीति सतः-निरु० २।२४। बलेन। प्रभावेण (वाजिना) वज गतौ-घञ्। वाजो वेगः। अन्नम्-निघ० २।७। बलम्-निघ० २।९। अत इनिठनौ पा० ५।२।११५। इति इति। वेगवता अन्नवता ॥