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Atharvaveda / 5 / 16 / 5

यदि॑ पञ्चवृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि॑ ॥ 5॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 5 | Sukta : 16 | Paryay : | Mantra No : 5

In Hindi:

ऋषि : विश्वामित्रः | देवता : एकवृषः | छन्द : साम्न्युष्णिक् | स्वर :

विषय : पुरुषार्थ का उपदेश।

पदपाठ : यदि॑ । प॒ञ्च॒ऽवृ॒ष: । असि॑ । सृ॒ज । अ॒र॒स: । अ॒सि॒ ॥१६.५॥

पदार्थ : (यदि) जो तू (पञ्चवृषः) पाँच [भूतों, पृथिवी, जल, तेज, वायु, आकाश] पर ऐश्वर्यवान् (असि) है, [सुख] (सृज) उत्पन्न कर, [नहीं तो] तू (अरसः) निर्बल (असि) है ॥५॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :५−(पञ्चवृषः) पञ्चभूते क्षित्यप्तेजोवायुव्योमात्मकेषु समर्थः ॥