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Atharvaveda / 5 / 16 / 6

यदि॑ षड्वृ॒षोऽसि॑ सृ॒जार॒सोऽसि॑ ॥ 6॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 5 | Sukta : 16 | Paryay : | Mantra No : 6

In Hindi:

ऋषि : विश्वामित्रः | देवता : एकवृषः | छन्द : आसुर्यनुष्टुप् | स्वर :

विषय : पुरुषार्थ का उपदेश।

पदपाठ : यदि॑ । ष॒ट्ऽवृ॒ष: । असि॑ । सृ॒ज । अ॒र॒स: । अ॒सि॒ ॥१६.६॥

पदार्थ : (यदि) जो तू (षड्वृषः) छह [काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, अहङ्कार] पर समर्थ (असि) है, [सुख] (सृज) उत्पन्न कर, [नहीं तो] तू (अरसः) निर्बल (असि) है ॥६॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :६−(षड्वृषः) षड्वर्गे कामक्रोधलोभमोहमदमात्सर्येषु समर्थः ॥