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Atharvaveda / 8 / 10 / 2

सोद॑क्राम॒त्सा गार्ह॑पत्ये॒ न्य᳡क्रामत्। 2॥

Veda : Atharvaveda
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| Paryay : | Sukta : 10 | Paryay : 1 | Mantra No : 2

In Hindi:

ऋषि : अथर्वाचार्यः | देवता : विराट् | छन्द : याजुषी जगती | स्वर :

विषय : ब्रह्म विद्या का उपदेश।

पदपाठ : सा ।उत् । अ॒क्रा॒म॒त् । सा । गार्ह॑ऽपत्ये । नि । अ॒क्रा॒म॒त् ॥१०.२॥

पदार्थ : (सा) वह [विराट्] (उत् अक्रामत्) ऊपर चढ़ी, (सा) वह (गार्हपत्ये) गृहपतियों से संयुक्त कर्म में (नि अक्रामत्) नीचे उतरी ॥२॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :२−(सा) विराट् (उत्) उपरि (अक्रामत्) पादं स्थापितवती (सा) (गार्हपत्ये) अ० ५।३१।५। गृहपतिभिः संयुक्ते कर्मणि (नि) नीचैः ॥