Atharvaveda / 8 / 10 / 4 / 6
तस्या॑ य॒मो राजा॑ व॒त्स आसी॑द्रजतपा॒त्रं पात्र॑म्।6॥
Veda : Atharvaveda | Paryay : 4 | Sukta : 10 | Paryay : 4 | Mantra No : 6
In English:
Seer : atharvaachaaryaH | Devta : viraaT | Metre : saamnii bRRihatii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : tasyaa yamo raajaa vatsa aasiidrajatapaatra.m paatram.6.
Component Words : tasyaaH . yama . raajaa . vatsaH . aasiit . rajata.apaatram . paatram .13.6.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वाचार्यः | देवता : विराट् | छन्द : साम्नी बृहती | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदपाठ : तस्या॑: । य॒म । राजा॑ । व॒त्स: । आसी॑त् । र॒ज॒त॒ऽपा॒त्रम् । पात्र॑म् ॥१३.६॥
पदार्थ : (यमः) नियमवान् (राजा) राजा [यह प्राणी] (तस्याः) उस [विराट्] का (वत्सः) उपदेष्टा, और (रजतपात्रम्) प्रीति वा ज्ञान वा पूजा का आधार [ब्रह्म] (पात्रम्) रक्षासाधन (आसीत्) था ॥६॥"
भावार्थ : टिप्पणी :६−(यमः) नियमवान् प्राणी (राजा) ऐश्वर्यवान् (वत्सः) वद व्यक्तायां वाचि-स। उपदेष्टा (रजतपात्रम्) पृषिरञ्जिभ्यां कित्। उ० ३।१११। रञ्ज रागे-अतच्। अथवा रजति गतिकर्मा-निघ० २।१४। रजयति रञ्जयति अर्चतिकर्मा-निघ० ३।१४। पूर्ववत्-अतच्। प्रीतिपात्रम्। ज्ञानाधारः। पूजाधारः परमेश्वरः। अन्यत् पूर्ववत् ॥