Atharvaveda / 8 / 10 / 4 / 15
तां बृह॒स्पति॑राङ्गिर॒सो᳡धो॒क्तां ब्रह्म॑ च॒ तप॑श्चाधोक्।15॥
Veda : Atharvaveda | Paryay : 4 | Sukta : 10 | Paryay : 4 | Mantra No : 15
In English:
Seer : atharvaachaaryaH | Devta : viraaT | Metre : viraaDgaayatrii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : taa.m bRRihaspatiraa~Ngiraso᳡dhoktaa.m brahma cha tapashchaadhok.15.
Component Words : taam . bRRihaspatiH . aa~NgirasaH . adhok . taam . brahma . cha . tapaH . cha . adhok .13.15.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वाचार्यः | देवता : विराट् | छन्द : विराड्गायत्री | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदपाठ : ताम् । बृह॒स्पति॑: । आ॒ङ्गि॒र॒स: । अ॒धो॒क् । ताम् । ब्रह्म॑ । च॒ । तप॑: । च॒ । अ॒धो॒क् ॥१३.१५॥
पदार्थ : (आङ्गिरसः) महाज्ञानी परमेश्वर के जाननेवाले (बृहस्पतिः) बड़े-बड़े गुणों के रक्षक पुरुष ने (ताम्) उस [विराट्] को (अधोक्) दुहा है, (ताम्) उसी से (ब्रह्म) वेद (च च) और (तपः) तप [ब्रह्मचर्य आदि व्रत वा ऐश्वर्य] को (अधोक्) दुहा है ॥१५॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१५−(बृहस्पतिः) अ० १।८।२। बृहतां गुणानां रक्षकः (आङ्गिरसः) अ० ५।१९।२। तदधीते तद्वेद। पा० ४।२।५९। अङ्गिरस्-अण्। आङ्गिरसः सर्वज्ञस्य परमेश्वरस्य वेत्ता (ब्रह्म) वेदम् (तपः) ब्रह्मचर्यादिव्रतम्। ऐश्वर्यम्। अन्यत् पूर्ववत् ॥