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Atharvaveda / 8 / 10 / 5 / 2

तस्या॒ इन्द्रो॑ व॒त्स आसी॑च्चम॒सः पात्र॑म्। 2॥

Veda : Atharvaveda | Paryay : 5 | Sukta : 10 | Paryay : 5 | Mantra No : 2

In Hindi:

ऋषि : अथर्वाचार्यः | देवता : विराट् | छन्द : साम्न्युष्णिक् | स्वर :

विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।

पदपाठ : तस्या॑: । इन्द्र॑: । व॒त्स: । आसी॑त् । च॒म॒स: । पात्र॑म् ॥१४.२॥

पदार्थ : (इन्द्रः) ऐश्वर्यवान् जीव (तस्याः) उस [विराट्] का (वत्सः) उपदेष्टा, और (चमसः) अन्न का आधार [ब्रह्म] (पात्रम्) रक्षासाधन (आसीत्) था ॥२॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :२−(चमसः) अ० ६।४७।३। अन्नाधारः परमेश्वरः। अन्यत् पूर्ववत् ॥