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Atharvaveda / 8 / 10 / 5 / 3

तां दे॒वः स॑वि॒ताधो॒क्तामू॒र्जामे॒वाधो॑क्। 3॥

Veda : Atharvaveda | Paryay : 5 | Sukta : 10 | Paryay : 5 | Mantra No : 3

In Hindi:

ऋषि : अथर्वाचार्यः | देवता : विराट् | छन्द : साम्न्युष्णिक् | स्वर :

विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।

पदपाठ : ताम् । दे॒व: । स॒वि॒ता । अ॒धोक् । ताम् । ऊ॒र्जाम् । ए॒व । अ॒धो॒क् ॥१४.३॥

पदार्थ : (ताम्) उस [विराट्] को (देवः) ज्ञानी (सविता) सर्वप्रेरक पुरुष ने (अधोक्) दुहा है, (ताम् ऊर्जाम्) उस बलवती को (एव) अवश्य (अधोक्) दुहा है ॥३॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :३−(देवः) गतिमान्। ज्ञानवान् (सविता) सर्वप्रेरकः पुरुषः (ऊर्जाम्) बलवतीम् (एव) अवश्यम्। अन्यद् गतम् ॥