Atharvaveda / 8 / 10 / 5 / 6
तस्या॑श्चि॒त्रर॑थः सौर्यवर्च॒सो व॒त्स आसी॑त्पुष्करप॒र्णं पात्र॑म्। 6॥
Veda : Atharvaveda | Paryay : 5 | Sukta : 10 | Paryay : 5 | Mantra No : 6
In English:
Seer : atharvaachaaryaH | Devta : viraaT | Metre : saamnii triShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : tasyaashchitrarathaH sauryavarchaso vatsa aasiitpuShkaraparNa.m paatram. 6.
Component Words : tasyaaH . chitra.arathaH . saurya.avarchasaH . vatsaH . aasiit . puShkara.aparNam . paatram .14.6.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वाचार्यः | देवता : विराट् | छन्द : साम्नी त्रिष्टुप् | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदपाठ : तस्या॑: । चि॒त्रऽर॑थ: । सौ॒र्य॒ऽव॒र्च॒स: । व॒त्स: । आसी॑त् । पु॒ष्क॒र॒ऽप॒र्णम् । पात्र॑म् ॥१४.६॥
पदार्थ : (सौर्यवर्चसः) सूर्य का प्रकाश जाननेवाला (चित्ररथः) विचित्र रमणीय गुणोंवाला [जीव] (तस्याः) उसका (वत्सः) उपदेष्टा और (पुष्करपर्णम्) पुष्टि का पूर्ण करनेवाला ब्रह्म (पात्रम्) रक्षासाधन (आसीत्) था ॥६॥"
भावार्थ : टिप्पणी :६−(चित्ररथः) विचित्ररमणीयगुणो जीवः (सौर्यवर्चसः) तदधीते तद्वेद। पा० ४।२।५६। सूर्यवर्चस्-अण्। सूर्यस्य प्रकाशवेत्ता (पुष्करपर्णम्) पुषः कित्। उ० ४।४। पुष पोषणे-करन्। धापॄवस्यज्यतिभ्यो नः। उ० ३।६। पॄ पालनपूरणयोः-न। पुष्टिपूरकं ब्रह्म। अन्यत् पूर्ववत् ॥