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Atharvaveda / 9 / 6 / 2 / 9

सर्वो॒ वा ए॒षोऽज॒ग्धपा॑प्मा॒ यस्यान्नं॒ नाश्नन्ति॑ ॥ 9॥

Veda : Atharvaveda | Paryay : 2 | Sukta : 6 | Paryay : 8 | Mantra No : 9

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अतिथिः, विद्या | छन्द : साम्न्यनुष्टुप् | स्वर :

विषय : अतिथि के सत्कार का उपदेश।

पदपाठ : सर्व॑: । वै । ए॒ष: । अज॑ग्धऽपाप्मा । यस्य॑ । अन्न॑म् । न । अ॒श्नन्ति॑ ॥७.९॥

पदार्थ : (सर्वः) प्रत्येक (एषः वै) वही [गृहस्थ] (अजग्धपाप्मा) विना भक्षण [नाश] किये हुए पापवाला [होता है], (यस्य अन्नम्) जिस का अन्न (न अश्नन्ति) वे [अतिथि] नहीं खाते हैं ॥९॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :९−(अजग्धपाप्मा) अनाशितपापः। अन्यत् सुगमम् ॥