Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Atharvaveda / 9 / 6 / 3 / 2

पय॑श्च॒ वा ए॒ष रसं॑ च गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑ ॥ 2॥

Veda : Atharvaveda | Paryay : 3 | Sukta : 6 | Paryay : 9 | Mantra No : 2

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अतिथिः, विद्या | छन्द : त्रिपदा पिपीलिकमध्या गायत्री | स्वर :

विषय : अतिथि के सत्कार का उपदेश।

पदपाठ : पय॑: । च॒ । वै । ए॒ष: । रस॑म् । च॒ ।गृ॒हाणा॑म् । अ॒श्ना॒ति॒ । य: । पूर्व॑: । अति॑थे: । अ॒श्नाति॑ ॥८.२॥

पदार्थ : (एषः) वह [गृहस्थ] (एव) निश्चय करके (पयः) दूध [वा अन्न] (च च) और (रसम्) रस [स्वादिष्ठ पदार्थ] को (गृहाणाम्) घरों के बीच (अश्नाति) भक्षण [अर्थात् नाश] करता है, (यः) जो (अतिथेः पूर्वः) अतिथि से पहिले (अश्नाति) खाता है ॥२॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :२−(पयः) दुग्धमन्नं वा (च) (वै) (एषः) (रसम्) स्वादिष्ठं पदार्थम् ॥