Atharvaveda / 9 / 6 / 6 / 4
तेषां॒ न कश्च॒नाहो॑ता ॥ 4॥
Veda : Atharvaveda | Paryay : 6 | Sukta : 6 | Paryay : 12 | Mantra No : 4
In English:
Seer : brahmaa | Devta : atithiH, vidyaa | Metre : ekapadaa praajaapatyaa gaayatrii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : teShaa.m na kashchanaahotaa . 4.
Component Words : teShaam . na . kaH . chana . ahotaa .11.4.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अतिथिः, विद्या | छन्द : एकपदा प्राजापत्या गायत्री | स्वर :
विषय : अतिथि के सत्कार का उपदेश।
पदपाठ : तेषा॑म् । न । क: । च॒न । अहो॑ता ॥११.४॥
पदार्थ : (यत्) जब (पात्रहस्ताः) पात्र हाथ में लिये हुए (पूर्वे) अगले (च) और (अपरे) पिछले (च) भी (परिवेष्टारः) परोसनेवाले पुरुष (प्रपद्यन्ते) आगे बढ़ते हैं, (ते) वे (एव) निश्चय करके (चमसाध्वर्यवः) अन्न के लिये हिंसारहित व्यवहार चाहनेवाले [होते हैं] [क्योंकि] (तेषाम्) उनमें से (कश्चन) कोई भी (अहोता) अदानी (न) नहीं [होता है] ॥३, ४॥"
भावार्थ : टिप्पणी :३, ४−(परिवेष्टारः) भोजनाय पात्रे भोजनसमर्पकाः (पात्रहस्ताः) पाणिषु भोजनपात्रयुक्ताः (पूर्वे) पूर्वगामिनः (च च) समुच्चये (अपरे) पश्चाद्गामिनः (प्रपद्यन्ते) प्रकर्षेण गच्छन्ति (चमसाध्वर्यवः) अध्वर्युर्व्याख्यातः। अ० ७।७३।५। चमस+अध्वर-क्यच्, उ प्रत्ययः। चमसाय अन्नाय अध्वरस्य हिंसारहितव्यवहारस्य इच्छुकाः (एव) (ते) पुरुषाः (तेषाम्) परिवेषकाणां मध्ये (न) निषेधे (कश्चन) कोऽपि (अहोता) अदानी ॥