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Atharvaveda / 9 / 6 / 6 / 12

स उप॑हूत॒ उप॑हूतः ॥ 12॥

Veda : Atharvaveda | Paryay : 6 | Sukta : 6 | Paryay : 12 | Mantra No : 12

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अतिथिः, विद्या | छन्द : एदपदासुरी जगती | स्वर :

विषय : अतिथि के सत्कार का उपदेश।

पदपाठ : स: । उप॑ऽहूत: । उप॑हूत: ॥११.१२॥

पदार्थ : (सः) वह [अतिथि जब] (उपहूतः) बुलाया गया है, [तब वह गृहस्थ] (उपहूतः) बुलाया गया, (इमम्) इस (लोकम्) लोक को (आप्नोति) पाता है और (अमुम्) उस [लोक] को (आप्नोति) पाता है ॥१२, १३॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :१२, १३−(आप्नोति) प्राप्नोति (इमम्) वर्तमानम् (लोकम्) जन्म (अमुम्) आगामिनम्। अन्यत् पूर्ववत् ॥