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Atharvaveda / 9 / 6 / 6 / 14

ज्योति॑ष्मतो लो॒काञ्ज॑यति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ 14॥

Veda : Atharvaveda | Paryay : 6 | Sukta : 6 | Paryay : 12 | Mantra No : 14

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अतिथिः, विद्या | छन्द : एकपदासुर्युष्णिक् | स्वर :

विषय : अतिथि के सत्कार का उपदेश।

पदपाठ : ज्योति॑ष्मत: । लो॒कान् । ज॒य॒ति॒ । य: । ए॒वम् । वेद॑ ॥११.१४॥

पदार्थ : वह [गृहस्थ] (ज्योतिष्मतः) प्रकाशमय (लोकान्) लोकों को (जयति) जीतता है, (यः) जो (एवम्) ऐसा (वेद) जानता है ॥१४॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :१४−(ज्योतिष्मतः) ज्ञानप्रकाशमयान् (लोकान्) ज्ञानदशाविशेषान् (जयति) उत्कर्षेण प्राप्नोति। अन्यत् पूर्ववत् ॥१४॥