Atharvaveda / 13 / 1 / 13
रोहि॑तो य॒ज्ञस्य॑ जनि॒ता मुखं॑ च॒ रोहि॑ताय वा॒चा श्रोत्रे॑ण॒ मन॑सा जुहोमि। रोहि॑तं दे॒वा य॑न्ति सुमन॒स्यमा॑नाः॒ स मा॒ रोहैः॑ सामि॒त्यै रो॑हयतु ॥ 13॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 13 | Sukta : 1 | Paryay : | Mantra No : 13
In English:
Seer : brahmaa | Devta : adhyaatmam, rohitaH, aadityaH | Metre : bhuriktriShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : rohito yaj~nasya janitaa mukha.m cha rohitaaya vaachaa shrotreNa manasaa juhomi. rohita.m devaa yanti sumanasyamaanaaH sa maa rohaiH saamityai rohayatu . 13.
Component Words : rohitaH . yaj~nasya . janitaa . mukham . cha . rohitaaya . vaachaa . shrotreNa . manasaa . juhomi . rohitam . devaaH . yanti . su.amanasyamaanaaH . saH . maa . rohaiH . saam.aityai . rohayatu .1.13.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अध्यात्मम्, रोहितः, आदित्यः | छन्द : अतिशक्वरगर्भा अतिजगती | स्वर :
विषय : जीवात्मा और परमात्मा का उपदेश।
पदपाठ : रोहि॑त: । य॒ज्ञस्य॑ । ज॒नि॒ता । मुख॑म् । च॒ । रोहि॑ताय । वा॒चा । श्रोत्रे॑ण । मन॑सा । जु॒हो॒मि॒ । रोहि॑तम् । दे॒वा: । य॒न्ति॒ । सु॒ऽम॒न॒स्यमा॑ना: । स: । मा॒ । रोहै॑: । सा॒म्ऽइ॒त्यै । रो॒ह॒य॒तु॒ ॥१.१३॥
पदार्थ : (रोहितः) सबका उत्पन्न करनेवाला [परमेश्वर] (यज्ञस्य) यज्ञ [देवपूजा, संगतिकरण और दानव्यवहार] का (जनिता) उत्पन्न करनेवाला (च) और (मुखम्) मुख [मुखिया] है, (वाचा) वाणी से, (श्रोत्रेण) श्रवण से और (मनसा) मन से (रोहिताय) सबके उत्पन्न करनेवाले [परमेश्वर की सेवा] के लिये (जुहोमि) मैं भोजन करता हूँ। (सुमनस्यमानाः) शुभचिन्तक (देवाः) विजय चाहनेवाले लोग (रोहितम्) सबके उत्पन्न करनेवाले [परमेश्वर] को (यन्ति) प्राप्त होते हैं, (सः) वह [परमेश्वर] (मा) मुझको (रोहैः) ऊँचाइयों के साथ (सामित्यै) समिति [संगति] के लिये (रोहयतु) ऊँचा करे ॥१३॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१३−(रोहितः) (यज्ञस्य) देवपूजासंगतिकरणदानव्यवहारस्य (जनिता) उत्पादकः (मुखम्) प्रधानः (च) (रोहिताय) परमेश्वरोपासनाय (वाचा) वाण्या (श्रोत्रेण) श्रवणेन (मनसा) चित्तेन (जुहोमि) हु अदने। अन्नं करोमि (रोहितम्) (देवाः) विजिगीषवः (यन्ति) प्राप्नुवन्ति (सुमनस्यमानाः) अ० १।३५।१। शुभचिन्तकाः (सः) परमेश्वरः (मा) माम् (रोहैः) उन्नतिभिः (सामित्यै) छान्दसो दीर्घः। समित्यै। संगतये (रोहयतु) उन्नयतु ॥