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Atharvaveda / 16 / 4 / 5

प्राणा॑पानौ॒ मामा॑ हासिष्टं॒ मा जने॒ प्र मे॑षि ॥5॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 16 | Sukta : 4 | Paryay : | Mantra No : 5

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : आदित्य | छन्द : आसुरी गायत्री | स्वर :

विषय : आयु की वृद्धि के लिये उपदेश।

पदपाठ : प्राणा॑पानौ । मा । मा॒ । हा॒सि॒ष्ट॒म् । मा । जने॑ । प्र । मे॒षि॒ ॥४.५॥

पदार्थ : (प्राणापानौ) हे प्राणऔर अपान ! तुम दोनों (मा) मुझे (मा हासिष्टम्) मत छोड़ो, (जने) मनुष्यों के बीच (मा प्र मेषि) कभी नष्ट न होऊँ ॥५॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :५−(प्राणापानौ) हेश्वासप्रश्वासौ (मा) माम् (मा हासिष्टम्) नैव त्यजतम् (जने) मनुष्येषु (प्र)प्रकर्षेण (मा मेषि) मीङ् हिंसायाम्-लुङ्। नाशं मा प्राप्नुयाम् ॥